स्वाभिमान मेरा झुकने न पाए,
भूखा रहकर भी सेवा कर पाऊँ।
ये नेक विचार कभी मन से न जाएँ,
हर चेहरे पर मुस्कान सजाऊँ।
प्यार भरा जब मिले माहौल,
हर दुख का बोझ भी हल्का हो जाए।
इंसानियत की राह पर चलकर,
जीवन दूसरों के काम आ जाए।
— राजेश भोजवाल
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