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मेरे मन की आवाज - चलो एक कहानी लिखते हैं

                
                                                         
                            मेरे मन की आवाज - चलो एक कहानी लिखते हैं
                                                                 
                            
कुछ लोग तुमसे बराबरी करने की सोचेंगे।
जब नहीं कर पाएंगे, तो तुम्हें नीचा दिखाने का डिप्लोमा लेंगे।
उससे भी मन नहीं भरेगा तो तुम्हारे दुश्मनों की वकालत करेंगे।
क्योंकि तुमसे जीतना उनके बस की बात नहीं,
इसलिए तुम्हारे दुश्मन से मिलकर तुम्हें हराने का प्रयास करेंगे।
तुम्हें इनसे उलझना नहीं है।
बस जो कर रहे हो उसमें और तेजी लानी है।
वे खून खौलाएंगे, तुम्हें बुरा बनाएंगे।
इसमें भी असफल हुए तो तुम पर लांछन लगाएंगे,
तुम्हारे परिवार को गंदा बताएंगे।
और ऐसे लोग बोलते कहाँ हैं? उनका कोई ठिकाना नहीं होता।
सोचा था इन जैसे लोगों से निपटने में समय बर्बाद करूंगा,
पर नहीं।
जिन्होंने संकल्प लिया है लक्ष्य पाने का,
उन्हें अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ना है।
*याद रखो - तुम गंदे लोगों को सुधारने नहीं आए।*
*तुम अपने अच्छे विचारों से समाज में बड़ा परिवर्तन करने आए हो।*
तो फिर मिलते हैं एक नई सोच के साथ।
तब तक के लिए नमस्कार।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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