ज़िंदगी दर्द से भरी है, फिर भी मुस्कुरा रहा हूँ,
अपने ज़ख्म छिपाकर, तुम्हें देखकर मुस्कुरा रहा हूँ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X