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ग़ज़ल -

                
                                                         
                            बनके सरदार वो करता नहीं है।
                                                                 
                            
चुपके से वार वो करता नहीं है।।

जहां छोड़ा है जिसके ख़ातिर मैंने।
मुझे क्यों प्यार वो करता नहीं है।।

दबा लेता है दिल के अंदर हर ग़म।
मगर इज़हार वो करता नहीं है।।

कुछ ऐसी पाई है तालीम उसने।
ग़लत स्वीकार वो करता नहीं है।।

मोहब्बत में हुआ है जबसे घाटा।
कोई व्यापार वो करता नहीं है।।

ज़रुरत है मुझे भी'राना'उसकी।
मदद पर यार वो करता नहीं है।।

- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'     
  
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3 महीने पहले

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