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दर्द और दुआ

                
                                                         
                            वो तलाश कर रहा था किसी अपने को
                                                                 
                            
खोज रहा था वो दर्द के हिस्से को
फर्क़ इतना था कि दूसरों के दर्द थे दामन में
मेहसूस कर रहा था तुम्हारे दर्द को
सुना था तुमने भी जला दिया है उसकी हर खुशी को
अब कुछ भी नहीं रहा उसके पास
बस एक दुआ ही बचा था
वो भी हाथ उठा कर मांग रहा था तुम्हारे लिए
अब उसके पास दर्द था,सहन था हौसला था
पर मौत नहीं था जो मांग लेता खुद के लिए
-राजीव
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2 महीने पहले

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