हर शख्स इश्क़ के कबील नहीं होता।
कोई दरिया नहीं होता,कोई साहिल नहीं होता।।
उम्मीद पर ही दुनिया कायम है यारो।
कुछ पास रहता है, तो कुछ हासिल नहीं होता।।
मोहब्बत के मज़हब में सब कुछ है जायज़।
कोई आबरा नहीं होता, कोई ज़ाहिल नहीं होता।।
इश्क इस दुनिया में, बड़ी पाक जंग हैं।
कोई मुहाफिज नहीं होता, कोई कातिल नहीं होता।।
दुनियां की बंदिशें, जहां पर टूट जाती है।
कोई असीर नहीं होता,कोई आहिल नहीं होता।।
प्यार के कारोबार का यही उसूल है।
कोई मुफीद नहीं होता, कोई बातिल नहीं होता।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X