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शायद शादी तुमसे नहीं, तुम्हारी यादों से हुई है

                
                                                         
                            शायद शादी तुमसे नहीं, तुम्हारी यादों से हुई है
                                                                 
                            

मेरी शादी शायद तुझसे नहीं,
तेरी यादों से हुई है,
तेरे नाम से,
और मेरी वफादारी से हुई है।

तू मेरे साथ नहीं था,
फिर भी मेरे भीतर रहा,
तेरी यादों ने ही
मेरा हाथ थामे रखा।

रिश्ता शायद दो लोगों का था,
मगर निभाया मैंने अकेले,
तू दूर रहा मुझसे,
फिर भी दिल ने तुझे
कभी पराया नहीं माना।

न तेरा साथ मिला,
न तेरे होने का एहसास,
फिर भी तेरे नाम के साथ
मैंने काट दिए
जिंदगी के कितने साल।

शायद मेरी शादी
तेरे साथ नहीं हुई थी,
तेरी यादों के साथ हुई थी,
तेरे नाम के साथ हुई थी,
और सबसे ज्यादा—
मेरी अपनी वफादारी के साथ हुई थी।

— रजनी
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एक दिन पहले

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