कितना शरीफ़ शख़्स है,
पत्नी को चाहता है,
और उस पर भी कमाल ये है -
अपनी को चाहता है।
दुनिया की हर औरत में
ख़ूबसूरती तलाशता है,
मगर पत्नी में सिर्फ़
वफ़ादारी तलाशता है।
ख़ुद के हर अतीत को
वो मज़ाक में टाल देता है,
और पत्नी के अतीत का
पूरा हिसाब माँगता है।
वाह रे समाज के संस्कार,
पुरुष की चाहत को फ़ितरत कहते हैं,
और औरत की चाहत को
चरित्र का सवाल बनाते हैं।
- रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X