आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रेम का दूसरा नाम विरह

                
                                                         
                            प्रेम का दूसरा नाम विरह
                                                                 
                            

प्रेम का दूसरा नाम घुटन है,
विरह है, तड़प है, तपन है,
एक ऐसी आग है सीने में,
जिसका न धुआँ है, न दहन है।

जिसके बिना जिया न जाए,
जिसके साथ रहा न जाए,
दिल हर पल उसी को चाहे,
और उसे अपना कहा न जाए।

रातें करवटों में कटती हैं,
दिन उसकी याद में ढलता है,
चेहरा भले ही शांत रहे,
भीतर कुछ हर पल जलता है।

न जीने की वजह मिलती है,
न मरने से छुटकारा है,
प्रेम में डूबे हुए मन का
बस विरह ही सहारा है।

न प्यास बुझती है मिलने से,
न दूरी में चैन आता है,
जिसे भूलना चाहो सबसे ज़्यादा,
वही सबसे ज़्यादा याद आता है।

प्रेम फूलों की सेज नहीं,
यह काँटों पर चलने का नाम है,
जिसमें सुकून की तलाश अधूरी हो,
शायद वही प्रेम की तपन है।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर