प्रेम और शक्ति
स्त्री का गहना है प्रेम,
जो उसके हृदय को सजाता है।
अपनेपन की कोमल छाँव में,
हर रिश्ते को महकाता है।
पुरुष का गहना है शक्ति,
जो संघर्षों से लड़ना सिखाती है।
मुश्किल राहों पर चलकर,
मंज़िल तक पहुँचाती है।
स्त्री के प्रेम में करुणा है,
पुरुष की शक्ति में साहस है।
दोनों जब मिलकर चलते हैं,
तभी जीवन में सच्चा विकास है।
प्रेम बिना शक्ति अधूरी है,
शक्ति बिना प्रेम वीरान।
दोनों का सुंदर संगम ही,
बनाता है जीवन महान।
— रजनी
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