आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुझे भगवान मत बनाओ

                
                                                         
                            मुझे भगवान मत बनाओ
                                                                 
                            

मेरे पति ने तो मुझे
भगवान बना दिया,
हर बात पर हाथ जोड़कर कहते हैं—
“मैं बदल नहीं सकता,
मैं तुम्हारी सुन नहीं सकता,
तुम जाना चाहती हो
तो चली जाओ।”

दशकों साथ रहकर भी
हर तीसरे दिन
हाथ जोड़कर यही कहना—
“तुम जा सकती हो...”

क्योंकि शायद
मुझे छोड़ देना आसान है,
मगर मुझे इंसान समझना मुश्किल।

इंसान समझोगे तो
उसकी भावनाएँ समझनी पड़ेंगी,
उसकी उम्मीदें सुननी पड़ेंगी,
उसकी वफ़ा का जवाब
अपनी वफ़ा से देना पड़ेगा।

भगवान को तो
बस हाथ जोड़कर छोड़ सकते हो,
मगर इंसान
तुमसे रिश्ते में
साथ, सम्मान और वफ़ा माँगेगा।

शायद इसलिए
तुमने मुझे भगवान बना दिया,
ताकि अपनी हार मान लेना भी
तुम्हें आसान लगे।

पर सुनो—
मैं भगवान नहीं हूँ,
मैं भी एक इंसान हूँ,
मुझे पूजा नहीं,
बस समझा और निभाया जाना है।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 hour ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर