मुझे भगवान मत बनाओ
मेरे पति ने तो मुझे
भगवान बना दिया,
हर बात पर हाथ जोड़कर कहते हैं—
“मैं बदल नहीं सकता,
मैं तुम्हारी सुन नहीं सकता,
तुम जाना चाहती हो
तो चली जाओ।”
दशकों साथ रहकर भी
हर तीसरे दिन
हाथ जोड़कर यही कहना—
“तुम जा सकती हो...”
क्योंकि शायद
मुझे छोड़ देना आसान है,
मगर मुझे इंसान समझना मुश्किल।
इंसान समझोगे तो
उसकी भावनाएँ समझनी पड़ेंगी,
उसकी उम्मीदें सुननी पड़ेंगी,
उसकी वफ़ा का जवाब
अपनी वफ़ा से देना पड़ेगा।
भगवान को तो
बस हाथ जोड़कर छोड़ सकते हो,
मगर इंसान
तुमसे रिश्ते में
साथ, सम्मान और वफ़ा माँगेगा।
शायद इसलिए
तुमने मुझे भगवान बना दिया,
ताकि अपनी हार मान लेना भी
तुम्हें आसान लगे।
पर सुनो—
मैं भगवान नहीं हूँ,
मैं भी एक इंसान हूँ,
मुझे पूजा नहीं,
बस समझा और निभाया जाना है।
— रजनी
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