आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मोहब्बत और महत्वाकांक्षा

                
                                                         
                            मोहब्बत और महत्वाकांक्षा
                                                                 
                            

यदि प्रेम हासिल हो जाता,
तो महत्वाकांक्षा न होती,
दिल को पाने की चाह होती,
तो दुनिया जीतने की प्यास न होती।

जिसे हम अपना बनाना चाहते थे,
वही अगर अपना हो जाता,
तो शायद
खुद को साबित करने का जुनून भी
कहीं खो जाता।

अधूरी मोहब्बत ने ही
ख्वाबों को बड़ा किया,
दर्द ने ही
हौसलों को खड़ा किया।

जिसे पाने की चाह में
हमने खुद को खोया,
उसी ने शायद
हमें खुद से मिलाया।

कभी-कभी
जो प्रेम हमें नहीं मिलता,
वही हमारी महत्वाकांक्षा बन जाता है—
और इंसान
किसी को पाने से नहीं,
कुछ खो जाने के बाद
सबसे ऊँचा उठता है।
-रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर