मेरी कब्र पर
मेरी कब्र पर
ज़्यादा ड्रामा न मचाया जाए,
जो आज सबसे ज़्यादा हमदर्द हैं,
उन्हें भी मेरे साथ लिटाया जाए।
जीते-जी जिन्हें
मेरी तकलीफ़ दिखाई नहीं दी,
आज मेरे जाने पर
आँसू बहाने की ज़रूरत नहीं।
जो मेरे दर्द में
कभी मेरे साथ खड़े नहीं हुए,
वे मेरी कब्र पर
झूठे किस्से न गढ़ें।
मेरी खामोशी को
अपनी मोहब्बत का नाम न दें,
जो जीवन भर साथ न दे सके,
वे मौत के बाद
मेरा अपना होने का दावा न करें।
बस इतना करना—
मेरी कब्र को
दिखावे से दूर रखना,
और जो सबसे बड़े हमदर्द बनते हैं,
उन्हें भी मेरे साथ ही सुला देना।
— रजनी
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