मेरा दौर आएगा
कुछ देर की ख़ामोशी है,
फिर शोर आएगा,
तुम्हारा वक़्त आया है,
मेरा दौर आएगा।
अभी ख़ामोश हूँ तो
मुझे कमज़ोर मत समझना,
मेरे सब्र को मेरी हार,
मेरी चुप्पी को लाचारी मत समझना।
वक़्त का पहिया है,
एक दिन ज़रूर घूमेगा,
आज जो मेरा हौसला तोड़ते हैं,
कल मेरा हौसला ही उन्हें चौंकाएगा।
अभी मेरी ख़ामोशी को
मेरी कहानी का अंत मत समझना,
मैं राख के नीचे दबी चिंगारी हूँ,
मुझे बुझा हुआ अंगार मत समझना।
मैंने भी अपने हिस्से की
ठोकरों से बहुत कुछ सीखा है,
हर दर्द को पीकर मैंने
ख़ुद को पहले से मज़बूत किया है।
आज भले ही मेरी पहचान
भीड़ में कहीं खोई है,
मगर मेरी मेहनत की सुबह
अभी रात की गोद में सोई है।
जिस दिन मेरी क़ाबिलियत
अपना परिचय देगी,
मेरी ख़ामोशी भी उस दिन
हज़ारों आवाज़ों से ज़्यादा बोलेगी।
— रजनी
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