मौन की सज़ा
मेरे जीवनसाथी को
जिसने चुप रहना सिखा दिया,
मेरे शब्दों से नहीं,
मेरे अधिकार से दूर कर दिया।
उसने सिर्फ़ एक इंसान को
मौन नहीं किया,
एक रिश्ते की धड़कनों को
भी ख़ामोश कर दिया।
ईश्वर सब देखता है,
हर आँसू का हिसाब रखता है,
किसने किसका दिल तोड़ा,
किसने किसकी आवाज़ छीनी—
सब जानता है।
जिसने मेरे जीवनसाथी को
मुझसे यूँ दूर किया,
शायद वह अपनी ही करनी की
सज़ा आज भुगत रहा है।
मेरी बद्दुआ भी यही है—
जिस दर्द को उसने बोया है,
उसे कभी न कभी
उस दर्द का अर्थ समझ आए।
क्योंकि किसी के रिश्ते में
ज़हर घोलकर
कोई सुखी नहीं रह सकता,
कर्मों की अदालत में
कोई निर्दोष नहीं बच सकता।
— रजनी
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