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गहराई का सच

                
                                                         
                            तुमने लहरों का शोर देखा,
                                                                 
                            
गहराई का सब्र नहीं इसलिए,
तुम्हें समंदर खारा ही लगा |

ठहरे होते कुछ पल अगर,
तो उसकी खामोशी भी सुन लेते|
हर लहर के पीछे एक कहानी है,
हर गहराई में अनमोल निशानी है|

जो केवल ऊपर -ऊपर देखते हैं,
वे अक्सर सच से अंजान रहते हैं
समंदर की पहचान उसके खारेपन से नहीं,
उसकी अथाह गहराई और विशाल हृदय से है|
- रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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