बच्चे माता-पिता के कर्ज़दार नहीं
बच्चे को जन्म देना तुम्हारा चुनाव था,
उस बच्चे का नहीं,
इस दुनिया में उसे लाने का फैसला तुम्हारा था,
उसकी कोई सहमति नहीं।
तुम स्वार्थी हो, प्रेमी नहीं,
अगर बच्चे को सिर्फ़ अपने लिए पालते हो,
प्रेमी हो तो उसे उड़ने दो,
क्यों उसके पंखों को बाँधते हो?
प्रेम है तो उसे संसार देखने दो,
अपनी पसंद से जीवन चुनने दो,
उसकी उड़ान को अपनी शान नहीं,
उसकी खुशी को अपनी पहचान बनने दो।
वह तुम्हारे पास रहे, यह उसकी खुशी हो,
तुम्हारी मजबूरी या कोई उधारी नहीं,
वह तुम्हारी सेवा करे तो प्रेम से करे,
किसी एहसान के बोझ तले दबकर नहीं।
कर्ज़दार तो माता-पिता हैं अपने बच्चों के,
बच्चे नहीं होते माता-पिता के कर्ज़दार।
क्योंकि जन्म देने का फैसला उनका था,
बच्चों ने तो नहीं चुना था यह संसार।
इसलिए मत कहना कभी अपने बच्चे से,
कि हमने तुम्हारे लिए कितना कुछ किया है,
उसे जन्म देकर, पाल-पोसकर बड़ा करना
कोई ऐसा कर्ज़ नहीं, जो उस पर चढ़ा दिया है।
बच्चों को प्रेम दो, अधिकार दो,
अपने सपनों को चुनने का आधार दो,
उन्हें अपने एहसानों के बोझ तले मत दबाओ,
माता-पिता हो तुम—अपना कर्तव्य निभाओ।
बच्चे तुम्हारी ज़िम्मेदारी हैं,
तुम्हारी बुढ़ापे की बीमा-पॉलिसी नहीं,
प्रेम उन्हें आज़ाद करना जानता है,
उन्हें बाँधना प्रेम की निशानी नहीं।
— रजनी
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