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अंधी सफलता

                
                                                         
                            अंधी सफलता
                                                                 
                            

भगवान,
उन सभी लोगों को
अंधी सफलता देना,
जिन्हें अपनों ने ही धोखा दिया,
जिनकी सादगी और ईमानदारी का
अपनों ने ही फायदा उठाया,
जिन्हें गिराने के लिए
हर संभव कोशिश की गई।

उन्हें इतनी सफलता देना
कि उनके घाव भी
एक दिन मुस्कुराना सीख जाएँ,
और जिन्होंने उन्हें तोड़ने की कोशिश की थी,
उन्हें अपने किए पर
सच्चा पछतावा हो जाए।

जिन्होंने किसी को नीचे गिराकर
खुद ऊपर उठना चाहा,
जिन्होंने छल, कपट और साजिशों से
अपनी ऊँचाई बनानी चाही,
उनकी नीयत भी एक दिन
आईने की तरह साफ दिखाई दे—
कि किसी को गिराकर
कोई सच में बड़ा नहीं बन सकता।

और जिन्हें उन्होंने
कमज़ोर समझा था,
उन्हीं की सच्चाई
एक दिन उनकी सबसे बड़ी ताकत बने।

बस इतनी कृपा करना प्रभु—
उन्हें इतनी अंधी सफलता देना
कि सफलता के शिखर पर पहुँचकर भी
उन्हें कभी उसका गुमान न हो।

क्योंकि उनकी जीत
किसी को हराने की नहीं,
बल्कि उस सच्चाई की जीत हो
जिसे कभी उनकी कमजोरी समझा गया था।

और जिन लोगों ने
उनकी अच्छाई को उनकी हार समझा था,
उन्हें एक दिन समझ आ जाए—
कि ईमानदार इंसान को
कुछ समय के लिए हराया जा सकता है,
लेकिन हमेशा के लिए
हराया नहीं जा सकता।

बस मेरा उन सभी के लिए
यही आशीर्वाद है—
सफलता मिले इतनी,
कि बदला लेने की जरूरत न पड़े,
और ऊँचाई मिले इतनी,
कि पीछे मुड़कर देखने पर भी
दिल में किसी के लिए
नफ़रत न बचे।
-रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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