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अकेलापन और सफलता

                
                                                         
                            अकेलापन और सफलता
                                                                 
                            

सफल इंसान
तब हो जाता है,
जब वह अकेला हो जाता है।

जब भीड़ का शोर
उसके भीतर से उतर जाता है,
जब तालियों की चाह
खत्म हो जाती है।

जब उसे यह समझ आ जाता है
कि हर सफर में
साथ चलने वाले नहीं मिलते,
और हर मोड़ पर
अपना कहने वाला नहीं होता।

अकेला होकर ही
वह खुद को सुन पाता है,
अपनी कमियों को पहचानता है,
अपने फैसले खुद लेता है
और गिरकर भी
अपने पैरों पर खड़ा होना सीखता है।

जिस दिन
किसी के सहारे की जरूरत
खत्म हो जाती है,
उसी दिन
इंसान की असली सफलता
शुरू हो जाती है।

क्योंकि सफलता केवल
ऊँचाई तक पहुँच जाना नहीं,
बल्कि इतनी मजबूती पा लेना है
कि अकेले खड़े होकर भी
खुद को अधूरा न समझो।
-रजनी
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एक घंटा पहले

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