आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तेरे बिना दो दिन…

                
                                                         
                            दो दिन हुए हैं तुझसे बात किए बिना,
                                                                 
                            
पर लगता है जैसे सदियाँ गुज़र गईं तुझे देखे बिना।

ना तेरा मैसेज, ना तेरी आवाज़ सुनाई देती है,
ये दिल हर पल बस तेरी ही दुहाई देता है।

पता नहीं कब इतना करीब आ गई तू,
मेरी हर खुशी, मेरी हर ज़रूरत बन गई तू।

अब तो आदत सी हो गई है तुझसे बात करने की,
तेरे साथ अपने हर ख्वाब को जीने की।

तू दूर है तो हर चीज़ अधूरी लगती है,
तेरे बिना ये ज़िंदगी थोड़ी मजबूरी लगती है।

सच कहूँ, तो तुझसे मोहब्बत कुछ इस कदर हो गई है,
कि तेरी कमी अब मेरी धड़कनों में उतर गई है।

मुझे नहीं पता ये इश्क़ है या तुझसे मेरी गहरी आदत,
बस इतना जानता हूँ कि तू है मेरी सबसे खूबसूरत चाहत।

तू जहाँ भी रहे, बस सलामत रहे, खुश रहे,
और जब लौटे, तो मेरे चेहरे की मुस्कान बनकर लौटे।

“मैं तुझसे दूर रहकर भी तुझसे ही जुड़ा रहता हूँ,
तू बात करे या ना करे, मैं हर पल तेरा इंतज़ार करता हूँ।”
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
31 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर