मां,
मैं फिर से एक बार
तेरी गोद में सोकर
अपना बचपन दोबारा जीना चाहती हूं।
खोकर तेरी बाहों में,
मैं फिर से संवारना चाहती हूं।
इस कलयुग में जहां हर कोई,
जीने की ख्वाहिश रखता है!
मैं तेरी ममता भरी जन्नत में
इस दुनिया से गुजारना चाहती हूं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X