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सुनो, नीरा! राज' मुन्तज़िर'

                
                                                         
                            सुनो, नीरा!
                                                                 
                            
सुनो,
तुम कितनी
भोली हो,
अनजान हो,
ख़ामोश हो,
आख़िर कैसे?
तुम में
ये जो सादगी है न
वह बिल्कुल कँवल जैसा
देखा होगा;
कभी उनकी उजली-उजली
पंखुड़ियों को।
बिल्कुल वैसी हो।
तुम जो हो जैसी हो
ठीक हो।
तुम्हें कुछ और होने की ज़रूरत नहीं
तुम पूरा-पूरा हो।
अगर तुम्हें कभी अधूरापन या खालीपन लगे
तो तुम नीरा होना
हो जाना- नीरा।
भर जाना,
भर जाना;
जैसे भरा है उसमें स्वयं अमृत।
और अगर तुम्हें कभी कुछ और
होना हो तो होना बिल्कुल ऐसे
जिसकी चेतना स्वतंत्र हो
हमेशा ऊँचा और ऊँचा उठने को
प्रेरित हो
हिमालय की तरह विराट।
होना हो अगर स्त्री;
तो होना एक ऐसी
स्त्री जिसके चेहरे पर तेज हो
आत्मा की,
न कि किसी भौतिक सौन्दर्य प्रसाधनों के कारण।
रखना होठों पर ऐसे स्वर
जो अंर्तमन की वीणा से हो उत्पन्न
झंकृत कर दे किसी शांत हृदय को
पैदा कर दे गीत।
रखना एक ऐसा हृदय
जिसमें
ज्ञान हो दया हो करुणा हो
परन्तु चेहरे पर गंभीरता नहीं
आत्मविश्वास हो।
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5 महीने पहले

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