समय नहीं है अब अधिक,
अभी भी समय है बदल जाने का।
कुछ नहीं रखा यहां किसी के लिए,
फिर यह अहंकार किसके लिए।
वक्त बीत रहा है,
तमस का पहरा है अब अधिक,
क्या बचा तेरा कुछ विशेष है,
अभी कुछ समय शेष है बदल जाने का।
यह गंदी सोच,बोली,भाषा,शब्दावली,बेलगाम जबान हावी है क्यों संस्कार पर ,किसके लिए ,
सब धोखा है,किसके लिए
समय बदल जाए,
राज गहरा जाए ,अंतिम पहर निकल जाए, किसके लिए,
उससे पहले बदल जाने का।
' राज '
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