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                            दोष, दे कर
                                                                 
                            
क्या फ़ायदा?

होश, बचा कर
शुरू करूं काम नया

अजीब, इन शब्दों से...
मोह हो गया है

इनकी वजह से, कुछ जीवन,
ऊहापोह का है...

शोर, भाए ना,
रत्ती भर!

गूंज, पाए ना,
कोई दूसरा घर

अपने हाल को देखके...
दिल क्योंकर... 

कैसे इस जाल से निकलें...
तरकीब हो गर?

कि डरा मन
घबराए ना... सुन कर...

बदला रंग...
रंगरेज़ की करें सब खबर...

कुछ सवाल,
असल में नहीं जन्में हैं!

बात,
आगे ना पीछे कुछ...
यथार्थ... मस्त, प्रसन्नमय है 

एहसास सही... मेरी फुर्ती के हैं...

उत्पात खुलके... धुन बुनती यूं है...

राज़ पर
बताने से रहे

ताक़ पर
अफ़साने बिसरे

-राहुल श्रीवास्तव


.
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2 महीने पहले

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