आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुझे हो नसीब... सब्र, यक़ीन की बौछार...

                
                                                         
                            ऐ लिखाई
                                                                 
                            
सब तेरे ख़ातिर

ऐ ख़ुदाई
मुझे ला दे सही राह पर

मन की सेहत...
दे दो मुझे 
पसंद की जन्नत...
हो पैरों तले

एक बार में संकल्प... हो जाए गर... ?

तमाम तरह के डर... छोड़ जाएं घर...

उन सबको, उनकी, ख़ूबसूरती मुबारक

मुझे हो नसीब... सब्र, यक़ीन की बौछार...

और रहे,
मेहनत करने की आदत!

और रहे,
सिर्फ़ आपका नाम ज़ुबां पर...

-राहुल


.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर