आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

संभलकर

                
                                                         
                            घबराने
                                                                 
                            
की बात नहीं है

बस बहकावों के,
पास जाना नहीं है!

मेहनत से
हर चीज़ मिली है...

सूरत पे,
क्यों नज़र मेरी है????

क़िस्मत को
खूब बातें सुनाई हैं...

प्यास में
सियाह रात तनवाई है 🫠

हालात बदलेंगे... ?
क्या पता

प्रभु बात सुनेंगे... ?
है तो, यही चाहा

देंगे प्रभु...
जब उनको इनाम देना होगा...

अब,
किसी को जल्दी...

किसी को देर से... क्यों?...

जो कुछ चाहा... कुछ और ही हो?...

सब भगवान पे
छोड़ रहा 🙏

अपनी नेमतों की ओर... देखूं

सारी चिंताओं को... दूर फेंकूं

पढ़ते जाऊं

भजते जाऊं


-राहुल



.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर