मेरी क्या गलती
कि मुझे प्यार पहले हो गया?
ना प्यार हासिल हो सका
ना नौकरी का अतापता
हां, खुमार,
हरदम रहता...
कच्चा सा
शायर हो गया हूं
सच्चा सा
कायर बन गया हूं
खुशबू ने,
गजब की चपत लगाई
हुज़ूर ने,
खैरात में दोस्ती बांटी
गम कहीं,
माथे में, जमा इस वक़्त...
बैठे रहो,
गीली आंखें...
देखके जाना भाई!
तन्हाई...
प्यास को बुलावा दे
चिंताओं...
की उधेड़बुन में उलझे रहें
यही
ज़िंदगी है मेरी...
फूटी झिर
हल्की हल्की 😐
कीचड़ में ही
कमल बनना पड़ेगा!
चीज़ें, वैसी की वैसी रहें...
मुझे खिलना होगा
मुस्कुराना होगा
शब्दखर्च बचाना होगा!
तभी कोई तराना निकलेगा...
चैन, सहर का सिरहाना रहेगा
सरस्वती मां का आना होगा
बुरी स्मृतियों का जाना होगा
-राहुल
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