मैं क्यों कवि बनने चला हूं?
एक रोज़ी तो ढूंढ नहीं पा रहा हूं!
प्यास में, सब महके एहसास... गंवा चुका हूं
परेशान मुझे, दूसरों के, सपनों के मकान... करते और!
मैं कैसे
इधर उधर ना देखूं
भगवान आप,
मेरी बदली आराधना भी देख लो...
बस मेरी एक मुराद सुन लो
मुझे उस नौकरी के लिए चुन लो...
-राहुल
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