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लिखाई का साथी

                
                                                         
                            चीज़ों का
                                                                 
                            
त्याग करना होगा

नया समा...
नया गीत गाना होगा

हार से
डरते क्यों हो राहुल?

हार कोई
रखे होंगे... गोविंद...

अब नहीं
चिंता करनी है

सोच इसी
फ़ज़ा तक रखनी है

जो चीज़ें गलत हैं
उनको अलविदा कहो आज से!!!

जो चीज़ें सही हैं
उन्हें निभा निभा पहुंचो ताज पे 

अच्छा नसीब
मुबारक हो अदा तुम्हें

'कला' अज़ीज़

हुई,
वरक दर वरक... अता हमें

हुए,
हर दर से... ठोकर खा...



.
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6 घंटे पहले

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