आज का दिन
अच्छा नहीं गया
वही वही कथन
सोचने में गुज़रा
कि झगड़ा क्यों हुआ?
कि कचड़ा क्यों मू से निकला?
भले अपशब्द मन में रहे...
मेरे ही करतूतों से बने, बार बार निकले
देखो, कुछ दिन बाद,
राहत मिलती है अगर...
वक़्त लगेगा...
पर, थम ही जाएगी उथल-पुथल🤞
घड़ियां...
काम कर ही जाएंगी...
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