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कविता

                
                                                         
                            गम
                                                                 
                            
दबाए रखो

किसी को
कुछ ना कहो

बातचीत की विधा नहीं आती?
कोई नहीं

थोड़ी देर बाद, वो आवाज़ उठेगी
सोई हुई

सही रास्ता...
बतलाने वाली

ठहराव में
नहीं कोई हानि

शांत,
रहने में ही भलाई है!

एकांत...
भुनाने की बारी आई है!

मस्त अब
पूरे जोश के साथ दौड़ेंगे

दौड़ से पूर्व
मांसपेशियां हिला लेंगे...
फीते वीते कस लेंगे...

बस, वो एक बार की झलक से
तौबा करो राहुल🙏

बस, जतन करते रह...
जल्द फ़लक पे होगा तेरा वजूद

खुदको तसल्ली देने...

ये प्रयास ही होंगे सबूत 





.
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एक महीने पहले

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