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कच्चे गिले

                
                                                         
                            सब,
                                                                 
                            
अपने-अपने में...

हम भी,
बुला-बुला थक गए 

कुछ नहीं,
हाथ में...

खड़े सबसे,
बाद में...

दोस्ती वोस्ती की ज़मीं...
टोह टोह पक गए!

'राहुल, कर ले तू आराम...'
ख़ुदा, अब कह दे 

थोड़ा,
ऐसे ही... लिख लें...

जाने,
कहां को हैं हवाएं...?

मैने नहीं कभी लिखने का चाहा था...
मैं ज़बरदस्ती लाया गया हूं!

बस, जल्दी से वो... आए सुबह...
कुछ भी लिखने-विखने का... भूल जाऊं

कलम कोई,
ला के पकड़ा दे...

वापिस लौटाऊं!

गीत गुनगुनाऊं... 

दीप जगमगाऊं... 

-राहुल




.




 
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20 घंटे पहले

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