भगवान
कहीं ठिकाना दे दो
परेशानियों भरा
ज़माना दे दो
मैं नहीं उनकी दीद चाहूं
बल्कि तन्हाई पे ही जीत पाऊं
कुछ तो त्याग का... सिला मिले
कच्चे धागों से ही सही... जिया सिले
मौके भी,
एक दो ही हैं
रोने की
नहीं गलती करनी है!
वो उत्साह... कहां चला गया?
मुझे उदास ही सही, मगर पाए... रस्ता
कि मेरा जीवन... कोई और लिख रहा होगा...
कभी तो कलाकार बनूं? कब तक कहानीकार रहूंगा
-राहुल
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