नौकरी,
लगी नहीं है...
तू किस ओर निगाह किया है?
अभी,
प्यार में ना पड़ो!
दोस्तों ने आगाह किया है...
प्रीत की कली...
समाज ने ही झुलसवाई!
सेहत की ऐसी तैसी...
ताज की खूबसूरती पे ना आंच आई
हुस्न तो
चारों तरफ है...
हम पर
किताब की जानिब हैं...
पहले कुछ
नौकरी वोकरी का हो जाए...
इस बीच, गर,
इरादों में मजबूती आ जाए...
तो क्या कहने...
हम, खुदसे,
खुश रहने लगेंगे
सभी खौफ,
मुनाफ़क़त के कीड़ों को... हरकाएंगे!
ये मकाम पाने
बड़ा मरना पड़ा है यारों
बस, यहां तक आने
जीना चुना है यारों
मैं गलती करूं
भगवान मुझे सज़ा देना!
मैं जहां सही होऊं...
भोले, मेरी हिफाज़त करना
-राहुल
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