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                            ज़िंदगी को,
                                                                 
                            
नसीब दे दो मालिक

कि लिखाई से
ही आश्नाई रहे...

जब भी रहूं फ़ारिग़...

जो मेरा है
वो सिर्फ मेरा ही है

इसलिए और तरफ़...
देखना नहीं है

थोड़ा...
दिल्लगी का भी मलाल करूं

जितना...
दिल की लगी को याद करता हूं

मुझे बेकारी से...
निकलना है...
हर हाल में!

जो वक़्त मेरा है...
मुट्ठी में, कसके,
रखना है बांधके ✊

सुकून के पल
भारी ना रहने पाएं

रूह को
तली से साफ़ किया जाए!

राहुल,
कोई तो नज़रिया मानना पड़ेगा...

कुछ कांटें, कुछ फूल लेके...
चलना होगा

हाथ पे हाथ धरके, बैठने का...
नहीं समय बचा!

जिस भी रंग, जैसी भी सुगंध...
का गुलदस्ता हासिल होए

हथिया वो टूटके...
लम्हों का गुच्छा

छटवा दे नभ से
बादलों का घेरा

कुछ भेज...
ऐसी उत्तेजना

'ज़मीं' से...
निकले गर्जना!

साफ़ अंबर हो मिला...

हक़ीकत में सपना हो ढला...



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एक महीने पहले

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