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अहमियत

                
                                                         
                            नज़र 
                                                                 
                            
की भीख ना मांगूं

इसे गुरूर...
इसे डर ना समझो...

मेरे, ध्यान में,
मेरा मंज़र है!

मांगी, साल से,
थोड़ी मोहलत है?

कब तक की...
वो पता नहीं

पर, तब तक की हो,
कोई खता नहीं

जिस सिम्त, ले जाना है...
बस उसी तरफ शब्द भेजेंगे!

और, ऐसा करते हुए...
बिल्कुल भी हाथ नहीं कापेंगे

एक इस
लिखाई का ही तो...
विश्वास है मुझे 🙂

कि जिसे करते समय...
हम कभी हताश ना हुए!

सरवत
प्रयास किए...

दोस्त की
संगत हो...

रिश्तों में
रंगत हो

हम सभी चीज़ों से
अवगत हों!

नौकरी की,
एक चादर सर पर हो...

देह की सही हालत...
और होश भी संभाले हों...

और... मैं क्या मांगूं?
दिन-रात हरि को जपूं 🙏

राहुल


.
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1 hour ago

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