इतने सारे
मन में ख़याल
कुछ करें खुश
कुछ करें बेहाल...
कर्म ही
बस हक़ीक़त...
ख़याल,
सिर्फ़ मायाजाल 🫠
नया बीज
कितने दिनों में फूटता है?
इंतज़ार की घड़ियों में...
क्या हवा, माटी से... रूठा रहता है?
मैं वो...
बीज समान हूं अभी
कि सर पे
काले घन हो कभी...
कि वक़्त पे
बिखराए उजाले रवि
मैं बनूं...
अच्छा कवि
मैं पाऊं...
मनचाही नौकरी
-राहुल
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