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क्या उम्मीद लगाते हैं

                
                                                         
                            लोग यह पूछें क्या है मृत्यु? तुम खोजो, किसी को खबर नहीं।
                                                                 
                            
जो चले गए वो चले गए, वो चेहरे नज़र फिर आए नहीं।
न जाने किस दुनिया में जाते हैं, वहां क्या उम्मीद लगाते हैं?
हमने तो उठाए जनाजे बेजान समझकर, ये कोई और ही जान बन जाते हैं।
घर त्यागा तो छोटी बात ये, परिवार त्यागा तो छोटी बात ये।
बातों की तो बात यही , ये जिस्म त्याग चले जाते हैं।
न जाने किस दुनिया में जाते हैं, वहां क्या उम्मीद लगाते हैं?
उम्र भर एक घोंसला बनाया, तिनका-तिनका जोड़ सजाया।
फिर भी समझ में समझ न आया, इस घोंसले को छोड़ ये पंछी किस गगन उड़ जाते हैं?
न जाने किस दुनिया में जाते हैं, वहां क्या उम्मीद लगाते हैं?"
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4 महीने पहले

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