चुनाव खत्म, नतीजे बाकी
जनता ने नेताओं के भविष्य का फैसला अपना भविष्य दांव पर लगाकर कर दिया
और अब पांच साल...
जम्हूरियत की अवाम
बड़ी बेवकूफ लगती है
तुम्हें इंतखाब करे
तो हमें बेवकूफ लगती है
हमें करे इंतखाब
तो तुम्हें बेवकूफ लगती है
न हमें न तुम्हें करे जो पसंद
कुल्हाड़ी पे पाँव धरे दिखती है
जम्हूरियत की अवाम
बड़ी बेवकूफ लगती है
पाँच बरस मस्त रहती है
मौसम-ए-इंतिखाब में
वोटिंग वोटिंग रटती है
बस इतनी सी ही वतनपरस्ती है
जम्हूरियत की अवाम
बड़ी बेवकूफ लगती है
शुमारियत के फरेब में फंसती है
दूसरों के नजरिए से
अपनी कहानी गढ़ती है
इश्तेहारों पर अमल करती है
जम्हूरियत की अवाम
बड़ी बेवकूफ लगती है
आपस में लड़ती भिड़ती है
धर्म जाति में बंट कर
अपना मुस्तकबिल चुनती है
जाने कैसे कैसे ताने बाने बुनती है
जम्हूरियत की अवाम
बड़ी बेवकूफ लगती है
राहुल निगम
कानपुर
7905509032
जम्हूरियत : लोकतंत्र
अवाम : जनता
इंतखाब : चुनाव
शुमारियत : आंकड़े
इश्तेहार : विज्ञापन
मुस्तकबिल : भविष्य
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X