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वो मुझे चाहती थी, मेरी चाहत कोई और थी

                
                                                         
                            वो मुझे चाहती थी, मेरी चाहत कोई और थी,
                                                                 
                            
मैं उसका श्याम था, मेरी राधा कोई और थी ।
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सोचकर बुरा लगता है, आख़िर उसके पास भी दिल था,
वो नादान निश्चल सी खड़ी थी, मेरी आँखे कहीं और थी।
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साथ बिताए सारे लम्हे समेट रखे है उसने ,
वो बातो में अपने राज़ बताती थी, मेरी बातो में कोई और थी।
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यादें ही बनकर रह गए सपने सारे जो उसने देख रखे थे,
वो महज़ एक कविता थी, मेरी कहानी कोई और थी ।
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2 महीने पहले

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