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मेरे बाद वो अपने राज किसी से तो बाँटती होगी

                
                                                         
                            मेरे बाद वो अपने राज किसी से तो बाँटती होगी,
                                                                 
                            
दिन के आठवें पहर में तो, वो भी मुझे याद करती होगी |
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क्या देखती होगी वो भी आसमान को जी भर कर,
क्या टूटते तारों से वो फिर से मुझे माँगती होगी |
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बरक़त बरसती है उन घरों में जहाँ उसके रिश्ते जाते है,
ख़ुदा के घर से भी तो दुआएँ आती होगी |
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तोहमतें हज़ार लगायी ज़माने ने मुझ पर,
उसकी सहेली से जानना है वो मेरे बारे क्या कहती होगी |
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फ़रेब रखती होगी ज़हन में समेटकर या फिर,
नए कपड़ो में पुराने बदन को तलाशतीं होगी |
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2 महीने पहले

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