मैं अपनी कहानी दोबारा लिखता
तुझे मेरे हिस्से लिखता,
.
तुझे पसंद है ना जंगल, झरने, नदियाँ
मैं अपना घर पहाड़ो में लिखता,
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मैं लिखता तेरी सारी खूबियाँ
और कमियाँ होती तो भी ना लिखता,
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मैं लिखता गज़ले तेरे नाम की
और मफ़्ता में भी तेरा नाम लिखता ।
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