ढेर सारी बाते करनी है तुमसे,
तुम एक शाम लेकर आना।
किसी दरिया किनारे बैठेंगे दोनों,
तुम अपनी यादों की किताब लेकर आना।
तुम्हारे चेहरे से नज़रे हटेंगी नहीं मेरी,
तुम ज़रा काजल लगा कर आना।
और ये वक़्त कही यूं ही ना बीत जाए,
तुम अपनी घड़ी घर भूलकर आना।
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