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मौन अर्थ

                
                                                         
                            लिखता रहा शब्दों को
                                                                 
                            
हो मौन अर्थ समझता रहा
क्या-क्या लिखा कब-कब लिखा
मंथन इसका करता रहा।
क्या आवश्यक था की
जान लूँ सभी शब्दोकोष
या जतन करूँ अभी की
बीत जाएं कुछ दिवस।
शब्द सीमा मे रहें
या अंत सीमा का रहे
हो जाए निर्णय यह तो
द्वन्द अंतर्मन का मिटे।
कौन-कौन मार्ग हैं
कौन सा है पथ प्रखर
पूछ कर ये जान लूँ
या मूक घड़ी को थाम लूँ।
उत्तरों की खोज मे
अनगिनत प्रश्न हैं?
शब्द वर्षा हो रही
पर प्रश्नचिन्ह हटे नही.....
और सीमा बढ़ेगी
या अंत सीमाओं का होगा
दम्भ की दूंन्दुभी बजेगी
या दम्भ टूटकर गिरेगा,
होगा ये निर्णय अखंडित
या निर्णय खंड- खंड होगा........
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3 महीने पहले

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