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रूठ जाना तेरी आदत होगी

                
                                                         
                            रूठ जाना तेरी आदत होगी,
                                                                 
                            
गर न मानो तो क़यामत होगी

ख़ुद को खोकर तुझे पाया हमने,
इश्क़ की बस यही दौलत होगी

दिल की बस्ती में उजाला ठहरा,
तेरी आँखों की इनायत होगी

धूप मुट्ठी में समेटे चलना,
छाँव की भी कोई चाहत होगी

प्यास सहरा की नहीं बुझती यूँ,
बादलों पर भी सियासत होगी

वक़्त के साथ बदलते चेहरे,
आईनों को भी शिकायत होगी

सच अगर तुमने कहा महफ़िल में,
झूठ वालों को जलालत होगी

ज़िक्र तेरा जो दुआ बन जाए,
रूह की सबसे बड़ी राहत होगी

सिर्फ़ मिलना ही मुहब्बत कब है,
दूर रहकर भी क़ुरबत होगी

जब भी तारीख़ लिखी जाएगी,
प्रेम की पहली हिमायत होगी

'रागिनी' शब्द अगर सच बोलें,
हर ग़ज़ल दिल की अमानत होगी

-रागिनी स्वर्णकार
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3 महीने पहले

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