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आज मन फिर कुछ उदास है

                
                                                         
                            आज मन फिर कुछ उदास है।
                                                                 
                            
ऐसा लग रहा है कि जन्मों की तलाश है।

संसार अच्छा तो है पर बेगाना है
यहां न कोई अपना है , मानो सब अनजाना है।
यहां कीमती कुछ भी नही
सबसे अनमोल तो सांस है।
आज मन फिर कुछ उदास है।

यहां हर पल कीमती,फिर भी माया उलझाती है।
सारे रिश्तों को निभाते - निभाते
जिंदगी बीत जाती है ।
अपने लिए कब जिए, यह बात कहां समझ में आती है।
क्योंकि मरने के बाद न कोई अपना
जीते जी तो सभी खासमखास है।
आज मन फिर कुछ उदास है।

चाहे कितना बड़ा हो खजाना
सब कुछ तो यही पड़ा रह जाना।
जब तक है जीना ,तब तक है पाना ।
जैसे सांस बंद ,फिर तो है जाना ।
क्योंकि फिर तो न रहती किसी से आस है
आज मन फिर कुछ उदास है
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4 घंटे पहले

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