नाराजगी नहीं है कोई,
हमें आपकी बातों से।
समझ चुके हैं कि
ज़रूर हम खास हैं,
तभी ज़ुबा पर आपकी
हमारे ज़िक्रे अल्फाज़ हैं।
नाराज़गी नहीं है कोई,
हमें आपकी बातों से।
समझ चुके हैं कि
जब तक हमारी बात है,
तब तक हममें कुछ बात है,
न होकर भी ग्रह हमारे साथ है।
नाराज़गी नहीं है कोई,
हमें आपकी बातों से।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X