जिंदगी लग गई यहाँ ठिकाना बनाते - बनाते..
कि.. जिंदगी लग गई यहाँ ठिकाना बनाते- बनाते,
तब तक मेरे दोस्त वहाँ का ठिकाना बन गया।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X