जी कहता मेरा अपने भीतर,
शांत रहकर चहकने को।
जी नहीं करता अब उलझने को,
कुछ समझाने, कुछ समझने को।
क्या गलत है, क्या लगता सही है?
कुछ भी देखने और परखने को।
जी कहता मेरा अपने ही भीतर,
शांत रहकर चहकने का।
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