आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सबसे अलग

                
                                                         
                            तुम हो सबसे अलग , तुम हो सबसे कमाल।
                                                                 
                            
नहीं है तुम जैसा कोई, चाहे हो यह दुनिया विशाल।
हाँ, तुम भी कर सकते हो चमत्कार
यदि पहचान लो अपने गुण और
अपने विकार।
कदम छोटे-छोटे हों सही,तुम रोज़ भर लो,
अपने सुंदर उज्ज्वल भविष्य का आज ही निर्माण कर लो।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर